सोशल मीडिया की दुनिया और कोचिंग इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम, जो जब भी बोलता है, तो सुर्खियां अपने आप बन जाती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं मशहूर शिक्षक और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा (Avadh Ojha) की। ओझा सर अपने बेबाक अंदाज और मोटिवेशनल शेरो-शायरी के लिए युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन इस बार वह अपनी किसी क्लास या चुनावी रैली की वजह से नहीं, बल्कि अपने एक बेहद अजीब और चौंकाने वाले वीडियो बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं।
चुनावी मैदान में उतरने और विधायक बनने की अपनी पहली कोशिश में नाकाम रहने के बाद, अवध ओझा ने अब सीधे भगवान के दरबार में एक अनोखी अर्जी लगा दी है। उन्होंने कहा है कि वह ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें कभी देश की सत्ता न मिले। पहली बार में यह बात किसी को भी हैरान कर सकती है, लेकिन इसके पीछे उन्होंने जो तर्क दिया है, उसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सत्ता में आने से क्यों डर रहे हैं अवध ओझा?
अक्सर लोग राजनीति में इसलिए आते हैं ताकि उन्हें पावर मिले, कुर्सी मिले और वे व्यवस्था को बदल सकें। लेकिन अवध ओझा का सोचना थोड़ा अलग और बेहद आक्रामक है। वायरल हो रहे वीडियो में ओझा सर ने अपने स्वभाव का एक ऐसा सच कबूला, जिसे सुनकर हर कोई दंग है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "मुझे बदतमीजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।" उन्होंने आज के दौर की राजनीति, खास तौर पर धार्मिक आधार पर होने वाले टकराव और सोशल मीडिया पर फैली अराजकता पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। अपने इसी गुस्से और सख्त स्वभाव को सत्ता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे कभी गलती से भी देश की सत्ता में आ गए, तो देश के 30 से 40 करोड़ लोगों को सीधे निपटा देंगे।
हालांकि, उनके इस बयान को पूरी तरह गंभीर राजनीतिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनका यह अंदाज उनके पुराने क्लासरूम वाले 'रफ एंड टफ' डांटने के तरीके जैसा ही था, जिसमें एक बड़ा हिस्सा व्यंग्य और आत्म-मंथन (Self-realization) का नजर आता है। उन्हें खुद यह अहसास है कि उनका गुस्सा देश चलाने के लोकतांत्रिक तरीकों से मेल नहीं खाता, इसलिए वह खुद ही सत्ता से दूर रहने की दुआ मांग रहे हैं।
चुनावी राजनीति में पहली कोशिश रही नाकाम
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC) की तैयारी कराने वाले अवध ओझा का नाम शिक्षा जगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अपनी इसी भारी-भरकम फैन फॉलोइंग और जमीन पर पकड़ को देखते हुए उन्होंने हाल ही में राजनीति की पिच पर कदम रखा था। वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे।
कहा जा रहा था कि युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता रंग लाएगी, लेकिन चुनावी राजनीति का गणित क्लासरूम से बिल्कुल अलग निकला। विधायक बनने की उनकी यह पहली कोशिश नाकाम रही और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी राजनीति में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली, लेकिन लोगों के बीच उनकी चर्चा कम नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: यूजर्स की प्रतिक्रियाएं
जैसे ही अवध ओझा का यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
- कुछ यूजर्स का कहना है कि ओझा सर ने समाज की कड़वी हकीकत को अपने चिर-परिचित मजाकिया और बेबाक अंदाज में सामने रखा है। आज के समय में सोशल मीडिया और समाज में जिस तरह की बदतमीजी बढ़ी है, उस पर उनका यह गुस्सा जायज है।
- वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि एक शिक्षक और पब्लिक फिगर होने के नाते '30-40 करोड़ लोगों को निपटाने' जैसी भाषा का इस्तेमाल (भले ही वह मजाक या व्यंग्य में हो) करने से बचना चाहिए था।
निष्कर्ष: क्या सच में ओझा सर राजनीति छोड़ चुके हैं?
इस पूरे वाकये से एक बात तो साफ है कि चुनावी मैदान हारने के बाद भी अवध ओझा लोगों के दिलों के मैदान में टिके हुए हैं। उनका यह ताजा बयान यह दिखाता है कि वे राजनीति के दांव-पेचों और वहां की कड़वाहट से खुद को दूर रखना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ओझा सर सच में हमेशा के लिए किताबों और क्लासरूम की दुनिया में लौट चुके हैं, या फिर भविष्य में उनकी इस 'प्रार्थना' में कोई नया मोड़ आएगा।
(नोट: अवध ओझा का यह बयान उनके वायरल वीडियो पर आधारित है। 'निपटा देंगे' जैसे शब्दों को उनके गुस्से और व्यंग्य के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए, इसे किसी भी तरह की वास्तविक हिंसात्मक धमकी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।)
