रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ को लेकर ऑस्कर से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। भारत की ओर से 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को आधिकारिक एंट्री चुना गया है। इस चयन के साथ ही यह भी सामने आया कि रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ऑस्कर के लिए भारत की अंतिम तीन फिल्मों में भी जगह नहीं बना सकी। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 14 सदस्यीय जूरी के सदस्य विवेक वासवानी ने बताया कि ‘धुरंधर’ को चयन प्रक्रिया में सिर्फ चार वोट मिले थे।
33 फिल्मों के बीच हुआ था मुकाबला
भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री चुनने के लिए इस बार अलग-अलग भाषाओं की कुल 33 फिल्मों पर विचार किया गया। इनमें 14 हिंदी फिल्में थीं, जबकि मराठी, तेलुगु और गुजराती भाषा की चार-चार फिल्मों ने दावेदारी पेश की थी। इसके अलावा तीन तमिल, एक मलयालम, एक नेपाली और नागालैंड से एक फिल्म भी चयन प्रक्रिया में शामिल थी। यानी जूरी के सामने केवल बॉलीवुड की फिल्में नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं से आई फिल्मों का व्यापक विकल्प मौजूद था।
‘धुरंधर’ को मिले सिर्फ चार वोट
विवेक वासवानी के मुताबिक 14 सदस्यीय जूरी के सामने ‘धुरंधर’ पर भी विचार हुआ था। जब उनसे पूछा गया कि फिल्म को कितने वोट मिले, तो उन्होंने संख्या चार बताई। इसका मतलब यह है कि फिल्म को जूरी के सभी सदस्यों का समर्थन नहीं मिला और वह आगे की चयन प्रक्रिया में अपनी जगह नहीं बना सकी। हालांकि, वोटों की संख्या अपने आप में फिल्म की लोकप्रियता या बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन का पैमाना नहीं है, क्योंकि यहां सवाल भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए सबसे उपयुक्त प्रतिनिधि फिल्म चुनने का था।
जूरी ने ‘धुरंधर’ को लेकर क्या कहा?
विवेक वासवानी ने बताया कि जूरी के कुछ सदस्यों को ‘धुरंधर’ पसंद आई थी, लेकिन उनके अनुसार पैनल ने इसे ऑस्कर के लिए उस स्तर की फिल्म नहीं माना, जिसकी वह तलाश कर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म जूरी की उस अपेक्षा के अनुरूप भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत नहीं करती थी, जिसे भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री चुनते समय महत्व दिया जा रहा था। यह जूरी सदस्य की ओर से बताई गई चयन प्रक्रिया की वजह है, न कि फिल्म पर किसी स्वतंत्र या आधिकारिक आलोचनात्मक फैसला।
आखिर ‘गोंधल’ में ऐसा क्या खास था?
मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का निर्देशन और लेखन संतोष दावखर ने किया है। इसकी कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में एक पारंपरिक गोंधल अनुष्ठान के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म की कहानी में लोक परंपरा, संगीत और नृत्य के साथ एक रहस्य और अपराध से जुड़ा घटनाक्रम सामने आता है। जूरी सदस्य के मुताबिक, भारतीय संस्कृति और एक अलग तरह की कहानी को एक साथ पेश करने वाली यह शैली फिल्म के चयन में महत्वपूर्ण रही। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने संभाली है।
अंतिम तीन फिल्मों में कौन-कौन शामिल थीं?
चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद जूरी के सामने अंतिम तीन फिल्मों के तौर पर ‘गोंधल’, ‘अंग’ और ‘मैं वापस आऊंगा’ रह गई थीं। इसके बाद ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया। यानी ‘धुरंधर’ अंतिम तीन की सूची तक भी नहीं पहुंच सकी। रिपोर्टों के मुताबिक, ‘गोंधल’ को जूरी का सर्वसम्मत समर्थन मिला, जबकि ‘अंग’ को 14 में से 11 वोट मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
‘गोंधल’ के लिए यह उपलब्धि क्यों बड़ी है?
‘गोंधल’ का चयन इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत की ओर से ऑस्कर की आधिकारिक एंट्री बनने वाली चौथी मराठी फिल्म है। इससे पहले ‘श्वास’, ‘हरिश्चंद्राची फैक्ट्री’ और ‘कोर्ट’ भारत की ओर से इस श्रेणी में चुनी जा चुकी हैं। ‘गोंधल’ का चयन इसके निर्देशक संतोष दावखर के लिए भी महत्वपूर्ण है। फिल्म ने 2025 में गोवा में हुए 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में वर्ल्ड प्रीमियर किया था, जहां दावखर को बेस्ट डायरेक्टर के लिए सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड मिला था।
‘धुरंधर’ की लोकप्रियता और ऑस्कर चयन अलग बातें
‘धुरंधर’ की चर्चा उसके व्यावसायिक प्रदर्शन और रणवीर सिंह की लोकप्रियता की वजह से जरूर रही है, लेकिन ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुनने की प्रक्रिया अलग आधार पर होती है। यहां जूरी को ऐसी फिल्म चुननी होती है, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयुक्त मानती है। इसलिए किसी फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता और उसका आधिकारिक ऑस्कर चयन, दोनों को एक ही कसौटी पर देखना सही नहीं होगा।
अब ‘गोंधल’ के आगे का सफर
भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद अब ‘गोंधल’ 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स की इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। हालांकि, आधिकारिक एंट्री चुना जाना ऑस्कर जीतने की गारंटी नहीं है। आगे फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों की प्रस्तुतियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। वहीं ‘धुरंधर’ का भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चयन नहीं हुआ है, और इसके पीछे जूरी की वोटिंग तथा भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधित्व को लेकर बताई गई प्राथमिकताएं मुख्य चर्चा में हैं।
