भारतीय रुपये में गिरावट का दौर लगातार जारी है। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4 फीसदी कमजोर होकर 96.35 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। लगातार दबाव के चलते रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।
किन वजहों से बढ़ा दबाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय मुद्रा पर बड़ा असर डाला है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपये में 5.5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी रुपये की कमजोरी की प्रमुख वजह मानी जा रही है।
100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है रुपया?
मुद्रा बाजार विशेषज्ञ के एन डे ने एएनआई से बातचीत में कहा कि फिलहाल बाजार में स्थिरता के संकेत नहीं दिख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो रुपया 100 प्रति डॉलर के स्तर को भी छू सकता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रुपये में लगातार गिरावट का असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता है। आयात महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है, जिससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश से आने वाले अन्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

