BRICS Summit 2026 In Delhi: भारत की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गई है। देश में ऐतिहासिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 (BRICS Summit 2026) का शंखनाद हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस महासम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर नेता भारत पहुंचे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन की लाइव तस्वीरें साझा करते हुए लिखा,
"BRICS Summit 2026 gets underway in Delhi." वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) के लिहाज से इस बैठक को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS Summit 2026 gets underway in Delhi. pic.twitter.com/WN7YWi5bTg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात ने खींचा ध्यान
इस सम्मेलन की सबसे पहली और सबसे बड़ी तस्वीर जो सामने आई है, उसने पूरी दुनिया के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) बेहद गर्मजोशी से मुलाकात करते नजर आए।
- भारत-रूस की मजबूत दोस्ती: तस्वीर में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक-दूसरे का हाथ थामे बेहद मुस्कुराते हुए बातचीत कर रहे हैं। वैश्विक प्रतिबंधों के बीच रूस और भारत के राष्ट्राध्यक्षों की यह केमिस्ट्री पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा संदेश है।
- भारत-चीन संबंधों पर नजर: सीमा विवाद और कूटनीतिक तनाव के बीच पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हाथ मिलाना और सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज दिखाना इस बात का संकेत है कि दोनों देश बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने के पक्ष में हैं।
ब्रिक्स 2026 के मुख्य एजेंडे क्या हैं?
नई दिल्ली में हो रही इस बैठक में कई ऐसे मुद्दों पर चर्चा होने वाली है, जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) की दिशा तय करेंगे:
- डीडॉलरलाइजेशन (De-dollarization): ब्रिक्स देश काफी समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को कम करने और अपनी स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार करने पर जोर दे रहे हैं। इस बैठक में इस रणनीति को और मजबूत किया जा सकता है।
- नए देशों की एंट्री: ब्रिक्स समूह का विस्तार हो रहा है। कई विकासशील देश इस संगठन का हिस्सा बनने के लिए कतार में हैं। दिल्ली शिखर सम्मेलन में नए देशों को शामिल करने के नियमों पर मुहर लग सकती है।
- डिजिटल इकॉनमी और यूपीआई (UPI): भारत अपनी डिजिटल भुगतान तकनीक (UPI) को ब्रिक्स देशों के बीच साझा करने और एक कॉमन डिजिटल पेमेंट नेटवर्क बनाने पर प्रस्ताव रख सकता है।
क्यों खास है भारत की मेजबानी?
भारत हमेशा से ब्रिक्स समूह में एक संतुलन बनाने वाले देश की भूमिका निभाता आया है। एक तरफ जहां चीन और रूस का झुकाव पश्चिमी देशों के विरोध की तरफ रहता है, वहीं भारत अमेरिका और यूरोप के साथ भी अपने मजबूत संबंध बनाए रखता है।
नई दिल्ली में इस सम्मेलन का सफल आयोजन वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत (Diplomatic Power) को दर्शाता है। पीएम मोदी की अगुवाई में भारत ग्लोबल साउथ (Global South) यानी विकासशील देशों की आवाज़ बनकर उभरा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दिल्ली में शुरू हुआ BRICS Summit 2026 केवल एक रूटीन बैठक नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों की एक बड़ी तस्वीर है। पुतिन, शी जिनपिंग और पीएम मोदी का यह मंच आने वाले दिनों में दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में बड़े बदलाव लेकर आएगा। भारत इस सम्मेलन के जरिए वैश्विक शांति और आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

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