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Friday, September 4, 2026

MP News: मध्य प्रदेश में IFMIS के जरिए 648 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी, 187 DDO जांच के घेरे में

MP News: मध्य प्रदेश के सरकारी भुगतान में 648 करोड़ की गड़बड़ी, 187 DDO जांच के घेरे में; IFMIS सिस्टम पर उठे सवाल

MP News: मध्य प्रदेश में IFMIS के जरिए 648 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी, 187 DDO जांच के घेरे में

MP News: मध्य प्रदेश में IFMIS के जरिए 648 करोड़ रुपये की संदिग्ध वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। 187 DDO जांच के घेरे में हैं।

MP News: सरकारी खजाने से जुड़े भुगतान में बड़ी वित्तीय अनियमितता

MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी भुगतान व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के सरकारी वित्तीय सिस्टम IFMIS (Integrated Financial Management Information System) के जरिए किए गए भुगतानों की जांच में करीब 648 करोड़ रुपये की अनियमित, संदिग्ध, डुप्लीकेट या अधिक भुगतान वाली राशि चिन्हित की गई है।

यह जांच State Financial Intelligence Cell (SFIC) द्वारा की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग विभागों के कुल 187 Drawing and Disbursing Offices (DDO) जांच के दायरे में आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 45 DDO स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े हैं।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 648 करोड़ रुपये की पूरी राशि को चोरी या गबन की अंतिम राशि नहीं माना जा सकता। जांच में जिन भुगतानों पर शक हुआ है, उनमें से प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है।

IFMIS क्या है और इसमें गड़बड़ी कैसे सामने आई?

मध्य प्रदेश में सरकारी भुगतानों को प्रोसेस करने के लिए Integrated Financial Management Information System यानी IFMIS का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कर्मचारियों के वेतन, सरकारी बिलों और दूसरे वित्तीय भुगतानों से जुड़ी जानकारी सिस्टम के माध्यम से प्रोसेस होती है।

SFIC ने इसी सरकारी भुगतान डेटा का विश्लेषण करते हुए ऐसे लेन-देन की पहचान की, जो सामान्य भुगतान प्रक्रिया से अलग दिखाई दिए। इस तरह की जांच में सिस्टम खुद संदिग्ध पैटर्न या भुगतान में असामान्य स्थिति को चिन्हित करता है, जिसके बाद संबंधित मामले की जांच की जाती है।

648 करोड़ रुपये की गड़बड़ी में क्या सामने आया?

जांच से जुड़े आंकड़ों के अनुसार करीब 349 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर और लगभग 299 करोड़ रुपये के संदिग्ध, अनियमित, फर्जी, डुप्लीकेट या अधिक भुगतान चिन्हित किए गए हैं। दोनों आंकड़ों को मिलाकर करीब 648 करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में आती है।

रिपोर्ट के अनुसार करीब 305 करोड़ रुपये के 199 संदिग्ध लेन-देन भी सामने आए, जिनमें निजी बैंक खातों से जुड़े ट्रांसफर शामिल हैं। कुछ मामलों में ये खाते अधिकारियों या कर्मचारियों के रिश्तेदारों और पत्नियों से जुड़े बताए गए हैं।

इसके अलावा करीब 293 करोड़ रुपये ऐसे पाए गए, जिन्हें ट्रेजरी के Personal Deposit यानी PD खातों में रहना था, लेकिन वे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।

187 DDO जांच के घेरे में, स्कूल शिक्षा विभाग सबसे आगे

इस मामले में अलग-अलग सरकारी विभागों के 187 DDO चिन्हित किए गए हैं।

इनमें:

  • स्कूल शिक्षा विभाग – 45 DDO
  • राजस्व विभाग – 43 DDO
  • जनजातीय कार्य विभाग – 26 DDO
  • पुलिस विभाग – 12 DDO
  • वन विभाग – 9 DDO
  • स्वास्थ्य विभाग – 8 DDO
  • उच्च शिक्षा और लोक निर्माण विभाग – 5-5 DDO

स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े DDO की संख्या सबसे अधिक बताई गई है।

Duplicate Employee Code से कैसे हो सकता था डबल पेमेंट?

जांच में IFMIS से जुड़ी कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत कमजोरियां भी सामने आई हैं।

कुछ मामलों में एक ही कर्मचारी के लिए अलग-अलग Employee Codes बनाए जाने की बात सामने आई। ऐसी स्थिति में एक कर्मचारी सिस्टम में दो अलग रिकॉर्ड के रूप में दिखाई दे सकता है और इससे डुप्लीकेट भुगतान की संभावना पैदा हो सकती है।

इसके अलावा कुछ मामलों में DDO के लॉगिन और पासवर्ड दूसरे कर्मचारियों के साथ साझा किए जाने की जानकारी सामने आई। इससे अधिकृत अधिकारी के लॉगिन का इस्तेमाल करके भुगतान संबंधी गतिविधियां किए जाने का जोखिम बढ़ जाता है।

मोबाइल नंबर और OTP को लेकर भी उठे सवाल

सरकारी भुगतान व्यवस्था में मोबाइल नंबर और OTP भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जांच में ऐसे मामले भी सामने आने की बात कही गई है, जहां कर्मचारियों के रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर बदले गए थे।

अगर किसी कर्मचारी की प्रोफाइल में बिना उचित सत्यापन के मोबाइल नंबर बदला जाए तो OTP आधारित सुरक्षा व्यवस्था के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।

इसी तरह कुछ मामलों में कर्मचारी की जानकारी और बैंक खाते में दर्ज नाम के बीच पर्याप्त मिलान नहीं होने की बात भी सामने आई है।

कितनी रकम की रिकवरी हुई?

जांच के दौरान सरकार की ओर से कुछ रकम की रिकवरी और अनियमित ट्रांसफर को वापस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

SFIC से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार करीब 56 करोड़ रुपये की रिकवरी और लगभग 164 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर को रिवर्स किया गया है। यानी कुल मिलाकर करीब 220 करोड़ रुपये की राशि रिकवर या रिवर्स की गई बताई गई है।

हालांकि, जांच अभी भी महत्वपूर्ण है और सभी मामलों में यह तय होना बाकी है कि संबंधित भुगतान वास्तव में वित्तीय धोखाधड़ी थे या किसी तकनीकी, प्रक्रियागत या अन्य कारण से संदिग्ध दिखाई दिए।

सरकार ने IFMIS में क्या सुधार किए?

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकारी वित्तीय सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इनमें:

  • Duplicate Employee Code को रोकने के लिए सिस्टम वैलिडेशन
  • DDO द्वारा कर्मचारी का मोबाइल नंबर बदलने पर प्रतिबंध
  • वेतन और भत्तों के भुगतान पर सिस्टम आधारित लिमिट
  • कर्मचारी के ग्रेड और निर्धारित वेतन के अनुसार भुगतान का मिलान
  • लॉगिन के लिए Two-Factor Authentication जैसी सुरक्षा व्यवस्था

शामिल हैं।

खर्च कम करने की कोशिश के बीच सामने आया मामला

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी खर्चों में कमी लाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी संदर्भ में मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं तथा सरकारी कार्यक्रमों में महंगे होटलों के इस्तेमाल को सीमित करने की चर्चा के बीच सरकारी भुगतान व्यवस्था से जुड़ी यह जांच खास महत्व रखती है।

एक तरफ सरकार गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी धन के भुगतान में इतनी बड़ी राशि के संदिग्ध लेन-देन सामने आने से वित्तीय निगरानी और सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या 648 करोड़ रुपये की पूरी रकम घोटाला साबित हो चुकी है?

नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

648 करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में चिन्हित हुई है। इसमें अनियमित ट्रांसफर के साथ-साथ संदिग्ध, डुप्लीकेट, फर्जी या अधिक भुगतान जैसे अलग-अलग प्रकार के मामले शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों के अनुसार सिस्टम में अलर्ट आने के बाद मामलों की जांच की जाती है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किसी भुगतान में वास्तव में सरकारी धन का गबन हुआ था या वह वैध लेन-देन था।

इसलिए फिलहाल इसे “648 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की जांच” कहना ज्यादा सटीक है।

निष्कर्ष

MP News से सामने आया यह मामला मध्य प्रदेश की सरकारी भुगतान व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा सकता है। IFMIS के जरिए किए गए भुगतानों में करीब 648 करोड़ रुपये की अनियमितताओं की पहचान और 187 DDO का जांच के दायरे में आना बताता है कि सरकारी वित्तीय सिस्टम में मजबूत निगरानी और डेटा वेरिफिकेशन कितना जरूरी है।

सबसे अहम बात यह है कि 648 करोड़ रुपये की पूरी राशि को अभी गबन या भ्रष्टाचार की अंतिम राशि नहीं कहा जा सकता। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी रकम वास्तव में गलत तरीके से ट्रांसफर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

वहीं, करीब 220 करोड़ रुपये की रिकवरी या रिवर्सल और सिस्टम में नए सुरक्षा उपाय लागू किए जाने से यह संकेत मिलता है कि सरकार मामले को लेकर वित्तीय नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

FAQ: MP News और IFMIS गड़बड़ी से जुड़े सवाल

1. मध्य प्रदेश में IFMIS से जुड़ा मामला क्या है?

मध्य प्रदेश में सरकारी भुगतानों के IFMIS डेटा की जांच में करीब 648 करोड़ रुपये के अनियमित, संदिग्ध, डुप्लीकेट या अधिक भुगतान चिन्हित किए गए हैं।

2. इस मामले में कितने DDO जांच के घेरे में हैं?

अलग-अलग विभागों के 187 Drawing and Disbursing Offices (DDO) जांच के दायरे में बताए गए हैं।

3. सबसे ज्यादा DDO किस विभाग के हैं?

स्कूल शिक्षा विभाग के 45 DDO जांच सूची में हैं, जो सभी विभागों में सबसे ज्यादा संख्या है।

4. क्या 648 करोड़ रुपये का पूरा घोटाला साबित हो चुका है?

नहीं। 648 करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में है। प्रत्येक संदिग्ध भुगतान की जांच के बाद ही वास्तविक गबन या वित्तीय धोखाधड़ी की पुष्टि हो सकती है।

5. IFMIS का पूरा नाम क्या है?

IFMIS का पूरा नाम Integrated Financial Management Information System है। इसका इस्तेमाल सरकारी वित्तीय भुगतान और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के प्रबंधन के लिए किया जाता है।

6. क्या इस मामले में पैसे की रिकवरी हुई है?

रिपोर्टों के अनुसार करीब 56 करोड़ रुपये की रिकवरी और 164 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर को रिवर्स किया गया है।

7. सरकार ने गड़बड़ी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

Duplicate Employee Code रोकने, मोबाइल नंबर बदलाव पर नियंत्रण, भुगतान की सिस्टम लिमिट और Two-Factor Authentication जैसे सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।

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